श्रीभगवानुवाच | भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वच: | यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥1॥
(महाबाहो) हे महाबाहो! (भूयः) फिर (एव) भी (मे) मेरे (परमम्) परम रहस्य और प्रभावयुक्त (वचः) वचनको (श्रृणु) सुन (यत्) जिसे (अहम्) मैं (ते) तुझ (प्रीयमाणाय) अतिशय प्रेम रखनेवालेके लिये (हितकाम्यया) हितकी इच्छासे (वक्ष्यामि) कहूँगा।
श्री भगवान् बोले- हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझे अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए हित की इच्छा से कहूँगा।