अर्जुन उवाच | परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् | पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ॥12॥
(भवान्) आप (परम्) परम (ब्रह्म) ब्रह्म (परम्) परम (धाम) धाम और (परमम्) परम (पवित्राम्) पवित्रा हैं क्योंकि (त्वाम्) आपको (सर्वे) सब (ऋषयः) ऋषिगण (शाश्वतम्) सनातन (दिव्यम्) दिव्य (पुरुषम्) पुरुष एवं (आदिदेवम्) देवोंका भी आदिदेव (अजम्) अजन्मा और (विभुम्) सर्वव्यापी (आहुः) कहते हैं
अर्जुन बोले- आप परम ब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं, क्योंकि आपको सब ऋषिगण सनातन, दिव्य पुरुष एवं देवों का भी आदिदेव, अजन्मा और सर्वव्यापी कहते हैं।