आहुस्त्वामृषय: सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा | असितो देवलो व्यास: स्वयं चैव ब्रवीषि मे ॥13॥
(तथा) वैसे ही (देवर्षिः) देवर्षि (नारदः) नारद तथा (असितः) असित और (देवलः) देवल ऋषि तथा (व्यासः) महर्षि व्यास भी कहते हैं (च) और (स्वयम्) स्वयं आप (एव)ही (मे) मेरे लिए (ब्रवीषि) कहते हैं।
वैसे ही देवर्षि नारद तथा असित और देवल ऋषि तथा महर्षि व्यास भी कहते हैं और आप भी मेरे प्रति कहते हैं।