स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम | भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ॥15॥
(भूतभावन) हे प्राणियों को उत्पन्न करनेवाले! (भूतेश) हे प्राणियों के प्रभु! (देवदेव) हे देवोंके देव! (जगत्पते) हे जगत्के स्वामी! (पुरुषोत्तम) हे पुरुषोतम! (त्वम्) आप (स्वयम्) स्वयं (एव) ही (आत्मना) अपनेसे (आत्मानम्) अपनेको (वेत्थ) जानते हैं।
हे भूतों को उत्पन्न करने वाले! हे भूतों के ईश्वर! हे देवों के देव! हे जगत् के स्वामी! हे पुरुषोत्तम! आप स्वयं ही अपने से अपने को जानते हैं।