पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् | सेनानीनामहं स्कन्द: सरसामस्मि सागर: ॥24॥
(पुरोधसाम्) पुरोहितोंमें (मुख्यम्) मुखिया (बृहस्पतिम्) बृहस्पति (माम्) मुझको (विद्धि) जान। (पार्थ) हे पार्थ! (अहम्) मैं (सेनानीनाम्) सेनापतियोंमें (स्कन्दः) स्कन्द (च) और (सरसाम्) जलाशयोंमें (सागरः) समुद्र (अस्मि) हूँ।
पुरोहितों में मुखिया बृहस्पति मुझको जान। हे पार्थ! मैं सेनापतियों में स्कंद और जलाशयों में समुद्र हूँ।