Chapter 10, Verse 34



मृत्यु: सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् | कीर्ति: श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति: क्षमा ॥34॥

Word Meanings

(अहम्) मैं (सर्वहरः) सबका नाश करनेवाला (मृत्युः) मृत्यु (च) और (भविष्यताम्) उत्पन्न होनेवालोंका (उद्भवः) उत्पत्ति-हेतु हूँ (च) तथा (नारीणाम्) स्त्रिायोंमें (कीर्तिः) कीर्ति, (श्रीः) श्री, (वाक्) वाक्, (स्मृृतिः) स्मृृति, (मेधा) मेधा, (धृृतिः) धृति (च) और (क्षमा) क्षमा हूँ।

Translation

मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ तथा स्त्रियों में कीर्ति (कीर्ति आदि ये सात देवताओं की स्त्रियाँ और स्त्रीवाचक नाम वाले गुण भी प्रसिद्ध हैं, इसलिए दोनों प्रकार से ही भगवान की विभूतियाँ हैं), श्री, वाक्‌, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ।