अर्जुन उवाच | मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम् | यत्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥1॥
(त्वया) आपने (अनुग्रहाय) कृप्या करने के लिए (मत्) शास्त्रों के अनुकूल विचार (यत्) जो (परमम्) श्रेष्ठ (गुह्यम्) गुप्त (अध्यात्मस×िज्ञतम्) अध्यात्मिकविषयक (वचः) वचन अर्थात् उपदेश (उक्तम्) कहा (तेन) उससे (मम) मेरा (अयम्) यह (मोहः) मोह (विगतः) नष्ट हो गया।
अर्जुन बोले- मुझ पर अनुग्रह करने के लिए आपने जो परम गोपनीय अध्यात्म विषयक वचन अर्थात उपदेश कहा, उससे मेरा यह अज्ञान नष्ट हो गया है।