रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम् | बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोका: प्रव्यथितास्तथाहम् ॥23॥
(महाबाहो) हे महाबाहो (ते) आपके (बहुवक्त्रानेत्राम्) बहुत मुख और नेत्रोंवाले (बहुबाहूरुपादम्) बहुत हाथ, जंघा और पैरोंवाले (बहूदरम्) बहुत उदरोंवाले और (बहुदंष्ट्राकरालम्) बहुत-सी दाढ़ोंके कारण अत्यन्त विकराल (महत्) महान् (रूपम्) रूपको (दृष्टवा) देखकर (लोकाः) सब लोग (प्रव्यथिताः) व्याकुल हो रहे हैं (तथा) तथा (अहम) मैं भी व्याकुल हो रहा हूँ।
हे महाबाहो! आपके बहुत मुख और नेत्रों वाले, बहुत हाथ, जंघा और पैरों वाले, बहुत उदरों वाले और बहुत-सी दाढ़ों के कारण अत्यन्त विकराल महान रूप को देखकर सब लोग व्याकुल हो रहे हैं तथा मैं भी व्याकुल हो रहा हूँ।