इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् | मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि ॥7॥
(गुडाकेश) हे अर्जुन! (अद्य) अब (इह) इस (मम) मेरे (देहे) शरीरमें (एकस्थम्) एक जगह स्थित (सचराचरम्) चराचरसहित (कृृत्स्न्नम्) सम्पूर्ण (जगत्) जगत्को (पश्य) देख तथा (अन्यत्) और (च) भी (यत्) जो कुछ (द्रष्टुम्) देखना (इच्छसि) चाहता हो सो देख।
हे अर्जुन! अब इस मेरे शरीर में एक जगह स्थित चराचर सहित सम्पूर्ण जगत को देख तथा और भी जो कुछ देखना चाहता हो सो देख (गुडाकेश- निद्रा को जीतने वाला होने से अर्जुन का नाम 'गुडाकेश' हुआ था)।