सम: शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयो: | शीतोष्णसुखदु:खेषु सम: सङ्गविवर्जित: ॥18॥
(शत्रौ, मित्रो) शत्राु-मित्रामें (च) और (मानापमानयोः) मान-अपमानमें (समः) सम है (तथा) तथा (शीतोष्णसुखदुःखेषु) सर्दी गर्मी और सुख-दुःखादि द्वन्द्वोंमें (समः) सम है (च) और (संगविवर्जितः) आसक्तिसे रहित है।
जो शत्रु-मित्र में और मान-अपमान में सम है तथा सर्दी, गर्मी और सुख-दुःखादि द्वंद्वों में सम है और आसक्ति से रहित है।