तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् | अनिकेत: स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नर: ॥19॥
(तुल्यनिन्दास्तुतिः) निन्दा स्तुति को समान समझनेवाला (मौनी) मननशील और (येन,केनचित्) जिस किसी प्रकारसे (सन्तुष्टः) संतुष्ट है और (अनिकेतः) ममता और आसक्तिसे रहित है वह (स्थिरमतिः) स्थिरबुद्धि (भक्तिमान्) भक्तिमान् (नरः) मनुष्य (मे) मुझको (प्रियः) प्रिय है।
जो निंदा-स्तुति को समान समझने वाला, मननशील और जिस किसी प्रकार से भी शरीर का निर्वाह होने में सदा ही संतुष्ट है और रहने के स्थान में ममता और आसक्ति से रहित है- वह स्थिरबुद्धि भक्तिमान पुरुष मुझको प्रिय है।