मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय | निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशय: ॥8॥
(मयि) मुझमें (मनः) मनको (आधत्स्व) लगा और (मयि) मुझमें (एव) ही (बुद्धिम्) बुद्धिको (निवेशय) लगा (अतः) इसके (ऊध्र्वम्) उपरान्त तू (मयि) मुझमें (एव) ही (निवसिष्यसि) निवास करेगा इसमें कुछ भी (संशयः) संश्य (न) नहीं है।
मुझमें मन को लगा और मुझमें ही बुद्धि को लगा, इसके उपरान्त तू मुझमें ही निवास करेगा, इसमें कुछ भी संशय नहीं है।