Chapter 13, Verse 2



श्रीभगवानुवाच | इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते | एतद्यो वेत्ति तं प्राहु: क्षेत्रज्ञ इति तद्विद: ॥2॥

Word Meanings

(कौन्तेय) हे अर्जुन! (इदम्) यह (शरीरम्) शरीर (क्षेत्राम्) क्षेत्रा (इति) इस नामसे (अभिधीयते) कहा जाता है और (एतत्) इसको (यः) जो (वेत्ति) जानता है (तम्) उसे (क्षेत्राज्ञः) क्षेत्राज्ञ (इति) इस नामसे (तद्विदः) तत्वको जाननेवाले ज्ञानीजन (प्राहुः) कहते हैं।

Translation

श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! यह शरीर 'क्षेत्र' (जैसे खेत में बोए हुए बीजों का उनके अनुरूप फल समय पर प्रकट होता है, वैसे ही इसमें बोए हुए कर्मों के संस्कार रूप बीजों का फल समय पर प्रकट होता है, इसलिए इसका नाम 'क्षेत्र' ऐसा कहा है) इस नाम से कहा जाता है और इसको जो जानता है, उसको 'क्षेत्रज्ञ' इस नाम से उनके तत्व को जानने वाले ज्ञानीजन कहते हैं।