Chapter 13, Verse 22



पुरुष: प्रकृतिस्थो हि भुङक्ते प्रकृतिजान्गुणान् | कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥22॥

Word Meanings

(प्रकृृतिस्थः) प्रकृतिमें स्थित (हि) ही (पुरुषः) पुरुष अर्थात् परमात्मा (प्रकृतिजान्) प्रकृतिसे उत्पन्न (गुणान्) त्रिगुणात्मक (भुड्क्ते) जीवात्मा को कर्मानुसार भोग भोगवाने के कारण भोगता है और इन (गुणसंगः) गुणोंका संग ही (अस्य) इस जीवात्माके (सदसद्योनिजन्मसु)अच्छी-बुरी योनियोंमें जन्म लेनेका(कारणम्)कारण है। यही प्रमाण गीता अध्याय 14 श्लोक 5 में भी है तथा अध्याय 18 श्लोक 16 में भी है।

Translation

प्रकृति में (प्रकृति शब्द का अर्थ गीता अध्याय 7 श्लोक 14 में कही हुई भगवान की त्रिगुणमयी माया समझना चाहिए) स्थित ही पुरुष प्रकृति से उत्पन्न त्रिगुणात्मक पदार्थों को भोगता है और इन गुणों का संग ही इस जीवात्मा के अच्छी-बुरी योनियों में जन्म लेने का कारण है। (सत्त्वगुण के संग से देवयोनि में एवं रजोगुण के संग से मनुष्य योनि में और तमो गुण के संग से पशु आदि नीच योनियों में जन्म होता है।)।