Chapter 13, Verse 7



इच्छा द्वेष: सुखं दु:खं सङ्घातश्चेतना धृति: | एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥7॥

Word Meanings

(इच्छा) इच्छा (द्वेषः) द्वेष (सुखम्) सुख (दुःखम्) दुःख (सङ्घातः) स्थूल देहका पिण्ड (चेतना) चेतना और (धृतिः) धृृति इस प्रकार (सविकारम्) विकारों के सहित (एतत्) यह (क्षेत्राम्) क्षेत्रा (समासेन) संक्षेपमें (उदाहृतम्) कहा गया है।

Translation

तथा इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, स्थूल देहका पिण्ड, चेतना (शरीर और अन्तःकरण की एक प्रकार की चेतन-शक्ति।) और धृति (गीता अध्याय 18 श्लोक 34 व 35 तक देखना चाहिए।)-- इस प्रकार विकारों (पाँचवें श्लोक में कहा हुआ तो क्षेत्र का स्वरूप समझना चाहिए और इस श्लोक में कहे हुए इच्छादि क्षेत्र के विकार समझने चाहिए।) के सहित यह क्षेत्र संक्षेप में कहा गया।