ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसा: | जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसा: ॥18॥
(सत्त्वस्थाः) सत्वगुणमें स्थित पुरुष अर्थात् विष्णु उपासक (ऊध्र्वम्) ऊपर वाले स्वर्गादि लोकोंको (गच्छन्ति) जाते हैं रजोगुणमें स्थित (राजसाः) राजस पुरुष अर्थात् ब्रह्मा उपासक (मध्ये) मध्य वाले पृथ्वी लोक में अर्थात् मनुष्यलोकमें ही (तिष्ठन्ति) रहते हैं और (जघन्यगुणवृत्तिस्थाः) तमोगुणके कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित (तामसाः) तामस पुरुष अर्थात् शिव उपासक (अधः) नीचे वाले पताल अर्थात् नरकों तथा अधोगति अर्थात् कीट, पशु आदि नीच योनियों को (गच्छन्ति) प्राप्त होते हैं। उदाहरण - रावण, भष्मासुर आदि।
सत्त्वगुण में स्थित पुरुष स्वर्गादि उच्च लोकों को जाते हैं, रजोगुण में स्थित राजस पुरुष मध्य में अर्थात मनुष्य लोक में ही रहते हैं और तमोगुण के कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादि में स्थित तामस पुरुष अधोगति को अर्थात कीट, पशु आदि नीच योनियों को तथा नरकों को प्राप्त होते हैं।