आशापाशशतैर्बद्धा: कामक्रोधपरायणा: | ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्जयान् ॥12॥
(आशापाशशतैः) आशाकी सैकड़ों फाँसियोंसे (बद्धाः) बँधे हुए मनुष्य (कामक्रोधपरायणाः) काम-क्रोधके परायण होकर (कामभोगार्थम्) विषय-भोगोंके लिये (अन्यायेन) अन्यायपूर्वक (अर्थस×चयान्) धनादि पदार्थाेको संग्रह करनेकी (ईहन्ते) चेष्टा करते रहते हैं।
वे आशा की सैकड़ों फाँसियों से बँधे हुए मनुष्य काम-क्रोध के परायण होकर विषय भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धनादि पदार्थों का संग्रह करने की चेष्टा करते हैं।