इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् ॥13॥
(मया) मैंने (अद्य) आज (इदम्) यह (लब्धम्) प्राप्त कर लिया और अब (इमम्) इस (मनोरथम्) मनोरथको (प्राप्स्ये) प्राप्त कर लूँगा। (मे) मेरे पास (इदम्) यह इतना (धनम्) धन (अस्ति) है और (पुनः) फिर (अपि) भी (इदम्) यह (भविष्यति) हो जाऐगा।
वे सोचा करते हैं कि मैंने आज यह प्राप्त कर लिया है और अब इस मनोरथ को प्राप्त कर लूँगा। मेरे पास यह इतना धन है और फिर भी यह हो जाएगा।