ॐ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविध: स्मृत: | ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिता: पुरा ॥23॥
(ॐ )ओं मन्त्रा ब्रह्म का(तत्) तत् यह सांकेतिक मंत्रा परब्रह्म का (सत्) सत् यह सांकेतिक मन्त्रा पूर्णब्रह्म का है (इति) ऐसे यह (त्रिविधः) तीन प्रकार के (ब्रह्मणः) पूर्ण परमात्मा के नाम सुमरण का (निर्देशः) आदेश (स्मृतः) कहा है (च) और (पुरा) सृृष्टिके आदिकालमें (ब्राह्मणाः) विद्वानों ने (तेन) उसी (वेदाः) तत्वज्ञान के आधार से वेद (च) तथा (यज्ञाः) यज्ञादि (विहिताः) रचे। उसी आधार से साधना करते थे। केवल हिन्दी अनुवाद: ओं मन्त्रा ब्रह्म का तत् यह सांकेतिक मंत्रा परब्रह्म का सत् यह सांकेतिक मन्त्रा पूर्णब्रह्म का है ऐसे यह तीन प्रकार के पूर्ण परमात्मा के नाम सुमरण का आदेश कहा है और सृृष्टिके आदिकालमें विद्वानों ने उसी तत्वज्ञान के आधार से वेद तथा यज्ञादि रचे। उसी आधार से साधना करते थे।
ॐ, तत्, सत्-ऐसे यह तीन प्रकार का सच्चिदानन्दघन ब्रह्म का नाम कहा है, उसी से सृष्टि के आदिकाल में ब्राह्मण और वेद तथा यज्ञादि रचे गए।