कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिन: | आहारा राजसस्येष्टा दु:खशोकामयप्रदा: ॥9॥
(कटुअम्ल लवण अत्युष्ण तीक्ष्ण रूक्ष विदाहिनः) कडुवे, खट्टे, लवणयुक्त बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक और (दुःखशोक आमयप्रदाः) दुःख चिन्ता तथा रोगोंको उत्पन्न करनेवाले (आहाराः) आहार (राजसस्य) राजस पुरुषको (इष्टाः) रजोगुण प्रधान अर्थात् जिनका ब्रह्मा उपास्य देव है उनको ऊपर लिखे आहार स्वीकार होते हैं। क्योंकि हिरणाकशिपु राक्षस ने ब्रह्मा की उपासना की थी। केवल अनुवाद: कडुवे, खट्टे, लवणयुक्त बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक और दुःख चिन्ता तथा रोगोंको उत्पन्न करनेवाले आहार राजस पुरुषको रजोगुण प्रधान अर्थात् जिनका ब्रह्मा उपास्य देव है उनको ऊपर लिखे आहार स्वीकार होते हैं। क्योंकि हिरणाकशिपु राक्षस ने ब्रह्मा की उपासना की थी।
कड़वे, खट्टे, लवणयुक्त, बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक और दुःख, चिन्ता तथा रोगों को उत्पन्न करने वाले आहार अर्थात् भोजन करने के पदार्थ राजस पुरुष को प्रिय होते हैं।