यत्तुžकामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुन: | क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ॥24॥
(तु) परंतु (यत्) जो (कर्म) कर्म (बहुलायासम्) बहुत परिश्रमसे युक्त होता है (पुनः) तथा (कामेप्सुना) भोगोंको चाहनेवाले पुरुष (वा) या (साहंकारेण) अहंकारयुक्त (क्रियते) किया जाता है (तत्) वह कर्म (राजसम्) राजस (उदाहृतम्) कहा गया है।
परन्तु जो कर्म बहुत परिश्रम से युक्त होता है तथा भोगों को चाहने वाले पुरुष द्वारा या अहंकारयुक्त पुरुष द्वारा किया जाता है, वह कर्म राजस कहा गया है।