विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानस: | ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रित: ॥52॥
(लघ्वाशी) अन्न जल का संयमी (विविक्त सेवी) व्यर्थ वार्ता से बच कर एकान्त प्रेमी (यत वाक् काय मानसः) मन-कर्म वचन पर संयम करने वाला (नित्यम्) निरन्तर (ध्यान योग परः) सहज ध्यान योग के प्रायाण (वैराग्यम्) वैराग्य का (समुपाश्रितः) आश्रय लेने वाला
...सात्त्विक धारण शक्ति के (इसी अध्याय के श्लोक 33 में जिसका विस्तार है) द्वारा अंतःकरण और इंद्रियों का संयम करके मन, वाणी और शरीर को वश में कर लेने वाला,...