यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर: | तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥78॥
(यत्रा) जहाँ (योगेश्वरः) योगेश्वर (कृष्णः) भगवान् श्रीकृष्ण हैं और (यत्रा) जहाँ (धनुर्धरः) गाण्डीव-धनुषधारी (पार्थः) अर्जुन हैं (तत्रा) वहींपर (श्रीः) श्री (विजयः) विजय (भूतिः) विभूति और (ध्रुवा) अचल (नीतिः) नीति है (मम) मेरा (मतिः) मत है।
हे राजन! जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीव-धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है- ऐसा मेरा मत है ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे मोक्षसन्न्यासयोगो नामाष्टादशोऽध्यायः।