अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च | नित्य: सर्वगत: स्थाणुरचलोऽयं सनातन: ॥24॥
(अयम्) यह (अच्छेद्यः) अच्छेद्य है (अयम्) यह परमात्मा (अदाह्यः) अदाह्य (अक्लेद्यः) अक्लेद्य (च) और (एव) निःसंदेह (अशोष्यः) अशोष्य है तथा (अयम्) यह परमात्मा (नित्यः) नित्य (सर्वगतः) सर्वव्यापी (अचलः) अचल (स्थाणुः) स्थिर रहनेवाला और (सनातनः) सनातन है।
क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और निःसंदेह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर रहने वाला और सनातन है।