अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् | सम्भावितस्य चाकीर्ति र्मरणादतिरिच्यते ॥34॥
(च) तथा (भूतानि) सब लोग (ते) तेरी (अव्ययाम्) बहुत कालतक रहनेवाली (अकीर्तिम्) अपकीर्तिका (अपि) भी (कथयिष्यन्ति) कथन करेंगे (च) और (सम्भावितस्य) माननीय पुरुष के लिये (अकीर्तिः) अपकीर्ति (मरणात्) मरणसे भी (अतिरिच्यते) बढ़कर है।
तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति का भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है।