अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिता: | निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दु:खतरं नु किम् ॥36॥
(तव) तेरे (अहिताः) वैरी लोग (तव) तेरे (सामथ्र्यम्) सामथ्र्यकी (निन्दन्तः) निन्दा करते हुए तुझे (बहून्) बहुत-से (अवाच्यवादान्) न कहने योग्य वचन (च) भी (वदिष्यन्ति) कहेंगे (ततः) उससे (दुःखतरम्) अधिक दुःख (नु) और (किम्) क्या होगा?
तेरे वैरी लोग तेरे सामर्थ्य की निंदा करते हुए तुझे बहुत से न कहने योग्य वचन भी कहेंगे, उससे अधिक दुःख और क्या होगा?।