भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम् | व्यवसायात्मिका बुद्धि: समाधौ न विधीयते ॥44॥
(भोगैश्वर्यप्रसक्तानाम्) जो भोग और ऐश्वर्यमें अत्यन्त आसक्त हैं, उन पुरुषोंकी (समाधौ) परमात्मा के चिन्तन में (व्यवसायात्मिका) निश्चयात्मिका (बुद्धिः) बुद्धि (न) नहीं (विधीयते) जान पड़ती।
जो भोग और ऐश्वर्य में अत्यन्त आसक्त हैं, उन पुरुषों की परमात्मा में निश्चियात्मिका बुद्धि नहीं होती।