कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिण: | जन्मबन्धविनिर्मुक्ता: पदं गच्छन्त्यनामयम् ॥51॥
(हि) क्योंकि (बुद्धियुक्ताः) तत्वज्ञान के आधार से समबुद्धिसे युक्त (मनीषिणः) ज्ञानीजन (कर्मजम्) कर्मोंसे उत्पन्न होनेवाले (फलम्) फलको (त्यक्त्वा) त्यागकर (जन्मबन्ध विनिर्मुक्ताः) जन्म रूपबन्धनसे पूर्ण रूप से मुक्त हो (अनामयम्) अनामी अर्थात् जन्म-मरण रोग रहित (पदम्) परम पद अर्थात् सतलोक को (गच्छन्ति) चले जाते हैं अर्थात् पूर्ण मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं अर्थात् जन्म-मरण का रोग पूर्णरूप से समाप्त हो जाता है।
क्योंकि समबुद्धि से युक्त ज्ञानीजन कर्मों से उत्पन्न होने वाले फल को त्यागकर जन्मरूप बंधन से मुक्त हो निर्विकार परम पद को प्राप्त हो जाते हैं।