Chapter 2, Verse 52



यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति | तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥52॥

Word Meanings

(यदा) जिस कालमें (ते) तेरी (बुद्धिः) बुद्धि (मोहकलिलम्) मोहरूप अर्थात् अज्ञान रूप दलदलको (व्यतितरिष्यति) भलीभाँति पार कर जाएगी अर्थात् आपको तत्वज्ञान हो जायेगा (तदा) उस समय तू (श्रुतस्य) सुने हुए (च) और (श्रोतव्यस्य) सुननेमें आनेवाले इस लोक और परलोक अर्थात् स्वर्ग-महास्वर्ग सम्बन्धी सभी भोगों का सुना सुनाया लोकवेद (निर्वेदम्)वेद विस्द्ध ज्ञान अर्थात् ज्ञानहीन वार्ता (गन्तासि) जैसा गया गुजरा महसूस होगा।

Translation

जिस काल में तेरी बुद्धि मोहरूपी दलदल को भलीभाँति पार कर जाएगी, उस समय तू सुने हुए और सुनने में आने वाले इस लोक और परलोक संबंधी सभी भोगों से वैराग्य को प्राप्त हो जाएगा।