या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी | यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुने: ॥69॥
(सर्वभूतानाम्) सम्पूर्ण प्राणियों के लिये (या) जो (निशा) रात्रिके समान है (तस्याम्) उस नित्य ज्ञानस्वरूप परमानन्दकी प्राप्तिमें (संयमी) स्थितप्रज्ञ योगी (जाग्रति) जागता है और (यस्याम्) जिस नाशवान् सांसारिक सुखकी प्राप्ति में (भूतानि) सब प्राणी (जाग्रति) जागते हैं (पश्यतः) परमात्माके तत्वको जाननेवाले (मुनेः) मुनिके लिये (सा) वह (निशा) रात्रिके समान है।
सम्पूर्ण प्राणियों के लिए जो रात्रि के समान है, उस नित्य ज्ञानस्वरूप परमानन्द की प्राप्ति में स्थितप्रज्ञ योगी जागता है और जिस नाशवान सांसारिक सुख की प्राप्ति में सब प्राणी जागते हैं, परमात्मा के तत्व को जानने वाले मुनि के लिए वह रात्रि के समान है।