Chapter 3, Verse 1



अर्जुन उवाच | ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन | तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥1॥

Word Meanings

(जनार्दन) हे जनार्दन! (चेत्) यदि (ते) आपको (कर्मणः) कर्मकी अपेक्षा (बुद्धिः) तत्वदर्शी द्वारा दिया ज्ञान (ज्यायसी) श्रेष्ठ (मता) मान्य है (तत्) तो फिर (केशव) हे केशव! (माम्) मुझे एक स्थान पर बैठ कर इन्द्रियों को रोक कर, गर्दन व सिर को सीधा रख कर गीता अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 तक वर्णित (घोरे) तथा युद्ध करने जैसे भयंकर (कर्मणि) तुच्छ कर्ममें (किम्) क्यों (नियोजयसि) लगाते हैं।

Translation

अर्जुन बोले- हे जनार्दन! यदि आपको कर्म की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ मान्य है तो फिर हे केशव! मुझे भयंकर कर्म में क्यों लगाते हैं?