मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा | निराशीर्निनर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वर: ॥30॥
(अध्यात्मचेतसा) पूर्ण परमात्मामें लगे हुए चितद्वारा (सर्वाणि) सम्पूर्ण (कर्माणि) कर्मोंको (मयि) मुझमें (सóयस्य) त्याग करके (निराशीः) आशारहित (निर्ममः) ममतारहित और (विगतज्वरः) संतापरहित (भूत्वा) होकर (युध्यस्व) युद्ध कर। इसी का प्रमाण गीता अध्याय 18 श्लोक 66 में है कि मेरी सर्व धार्मिक पूजाओं को मुझमें छोड़ कर सर्व शक्तिमान परमेश्वर की शरण में जा।
मुझ अन्तर्यामी परमात्मा में लगे हुए चित्त द्वारा सम्पूर्ण कर्मों को मुझमें अर्पण करके आशारहित, ममतारहित और सन्तापरहित होकर युद्ध कर।