श्रीभगवानुवाच | काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भव: || महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ॥37॥
(रजोगुणसमुद्भवः) रजोगुणसे उत्पन्न हुआ (एष) यह (कामः) विषय वासना अर्थात् सैक्स और (एष) यह (क्रोधः) क्रोध (महाशनः) जीव को अत्यधिक खाने वाला अर्थात् नष्ट करने वाला (महापाप्मा) बड़ा पापी है (एनम्) इस उपरोक्त पाप को ही तू (इह) इस विषयमें (वैरिणम्) वैरी (विद्धि) जान।
श्री भगवान बोले- रजोगुण से उत्पन्न हुआ यह काम ही क्रोध है। यह बहुत खाने वाला अर्थात भोगों से कभी न अघानेवाला और बड़ा पापी है। इसको ही तू इस विषय में वैरी जान।