श्रीभगवानुवाच | इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् | विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥1॥
(अहम्) मैंने (इमम्) इस (अव्ययम्) अविनाशी (योगम्) भक्ति मार्ग को (विवस्वते) सूर्यसे (प्रोक्तवान्) कहा था (विवस्वान्) सूर्यने अपने पुत्रा वैवस्वत (मनवे) मनु से (प्राह) कहा और (मनुः) मनुने अपने पुत्रा (इक्ष्वाकवे) राजा इक्ष्वाकुसे (अब्रवीत्) कहा।
श्री भगवान बोले- मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा।