एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभि: | कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वै: पूर्वतरं कृतम् ॥15॥
(पूर्वैः) पूर्वकालके (मुमुक्षुभिः) मुमुक्षुओंने (अपि) भी (एवम्) इस प्रकार (ज्ञात्वा) जानकर ही शास्त्रा विधि अनुसार साधना रूपी (कर्म) कर्म (कृतम्) विशेष कसक के साथ किये हैं (तस्मात्) इसलिये (त्वम्) तू भी (पूर्वैः) पूर्वजोंद्वारा (पूर्वतरम्,कृतम्) सदासे किये जानेवाले शास्त्रा विधि अनुसार भक्ति (कर्म) कर्मोंको (एव) ही (कुरु) कर।
पूर्वकाल में मुमुक्षुओं ने भी इस प्रकार जानकर ही कर्म किए हैं, इसलिए तू भी पूर्वजों द्वारा सदा से किए जाने वाले कर्मों को ही कर।