Chapter 5, Verse 11



कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि | योगिन: कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये ॥11॥

Word Meanings

(योगिनः) होटल में निवास की तरह संसार में रहने वाले भक्त (केवलैः) केवल (इन्द्रियैः) इन्द्रिय (मनसा) मन (बुद्धया) बुद्धि और (कायेन) शरीरद्वारा (अपि) भी (संगम्) आसक्तिको (त्यक्त्वा) त्यागकर (आत्मशुद्धये) अन्तःकरणकी शुद्धिके लिये अर्थात् आत्म कल्याण के लिए (कर्म) सत्यनाम सुमरण, दान, सतगुरु सेवा व संसार में शुद्ध आचरण रूपी कर्म (कुर्वन्ति) करते हैं।

Translation

कर्मयोगी ममत्वबुद्धिरहित केवल इन्द्रिय, मन, बुद्धि और शरीर द्वारा भी आसक्ति को त्याग कर अन्तःकरण की शुद्धि के लिए कर्म करते हैं।