Chapter 6, Verse 14



प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थित: | मन: संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्पर: ॥14॥

Word Meanings

(ब्रह्मचारिव्रते) ब्रह्मचारीके व्रतमें (स्थितः) स्थित (विगतभीः) भयरहित तथा (प्रशान्तात्मा) भलीभाँति शान्त अन्तःकरणवाला (मनः) मनको (संयम्य) रोककर (मच्चितः) लीन चितवाला (मत्परः) मतावलम्बी मत् अनुसार अर्थात् जो काल विचार दे रहा है ऐसे करता हुआ (युक्तः) साधना में संलग्न (आसीत) स्थित होवे।

Translation

ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित, भयरहित तथा भलीभाँति शांत अन्तःकरण वाला सावधान योगी मन को रोककर मुझमें चित्तवाला और मेरे परायण होकर स्थित होए।