Chapter 6, Verse 18



यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते | नि:स्पृह: सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥18॥

Word Meanings

(विनियतम्) एक पूर्ण परमात्मा की शास्त्रा अनुकूल भक्ति में अत्यन्त नियमित किया हुआ (चित्तम्) चित (यदा) जिस स्थितिमें (आत्मनि) परमात्मा में (एव) ही (अवतिष्ठते) भलीभाँति स्थित हो जाता है (तदा) उस कालमें (सर्वकामेभ्यः) सम्पूर्ण मनोकामनाओंसे (निःस्पृृहः) मुक्त (युक्तः) भक्तियुक्त अर्थात् भक्ति में संलग्न है (इति) ऐसा (उच्यते) कहा जाता है।

Translation

अत्यन्त वश में किया हुआ चित्त जिस काल में परमात्मा में ही भलीभाँति स्थित हो जाता है, उस काल में सम्पूर्ण भोगों से स्पृहारहित पुरुष योगयुक्त है, ऐसा कहा जाता है।