सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषत: | मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्तत: ॥24॥
(संकल्पप्रभवान्) संकल्पसे उत्पन्न होनेवाली (सर्वान्) सम्पूर्ण (कामान्) कामनाओंको (एव) वास्तव में (अशेषतः) जड़ामूल से अर्थात् समूल (त्यक्त्वा) त्यागकर और (मनसा) मनके द्वारा (इन्द्रियग्रामम्) इन्द्रियोंके (समन्ततः) सभी ओरसे (विनियम्य) भलीभाँति रोककर।
संकल्प से उत्पन्न होने वाली सम्पूर्ण कामनाओं को निःशेष रूप से त्यागकर और मन द्वारा इन्द्रियों के समुदाय को सभी ओर से भलीभाँति रोककर।