पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामह: | वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च ॥17॥
(अहम्) (अस्य) इस (जगतः) इक्कीस ब्रह्मण्डों वाले जगत्का (धाता) धाता अर्थात् धारण करनेवाला (पिता) पिता (माता) माता (पितामहः) पितामह (च) और (वेद्यम्) जानने योग्य (पवित्राम्) पवित्रा (ओंकारः) ओंकार तथा (ऋक्) ऋग्वेद (साम) सामवेद (च) और (यजुः) यजुर्वेद आदि तीनों वेद भी मैं ही हूँ।
इस संपूर्ण जगत् का धाता अर्थात् धारण करने वाला एवं कर्मों के फल को देने वाला, पिता, माता, पितामह, जानने योग्य, (गीता अध्याय 13 श्लोक 12 से 17 तक में देखना चाहिए) पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ।