Chapter 9, Verse 3



अश्रद्दधाना: पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप | अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ॥3॥

Word Meanings

(परन्तप) हे अर्जुन! (अश्रद्दधानाः) श्रद्धारहित (पुरुषाः) मनुष्य (अस्य) इस उपर्युक्त (धर्मस्य) धर्मके भक्ति मार्ग को (अप्राप्य) न प्राप्त होकर (माम्) मुझ ब्रह्म के (मृत्युसंसार वत्र्मनि) मृत्युलोक चक्रमें (निवर्तन्ते) चक्र लगाते रहते हैं।

Translation

हे परंतप! इस उपयुक्त धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मुझको न प्राप्त होकर मृत्युरूप संसार चक्र में भ्रमण करते रहते हैं।